Friday, 26 October 2012

बकरीद बनाम निर्दोषों की हत्या

आज बकरीद है । सभी अपने मुसलमान मित्रों को बधाइयाँ दे रहे होंगे । मैं भी एक ऐसे ही मित्र को बधाई देने को सोच रहा था लेकिन फिर मन में विचार आया कि बधाई संदेश में क्या लिखूँ , बकरा खाने की बधाई अथवा तथाकथित त्याग और बलिदान की बधाई ऐसे सामूहिक प्राणिहत्या पर्व पर दुख इस बात का है कि सारे विश्व के तथाकथित अहिंसावादी मौन हैं ।

मैं अब अपने किसी मुसलमान मित्र को बधाई तब दूँगा जब वह ऐसी नृशंस सामूहिक हत्याओं का परित्याग ही नहीं विरोध भी करेगा तथा अपनी तृष्णाओं का बलिदान करेगा ।

त्याग और बलिदान के इस पर्व को उसके उसी रूप में मनाया जाये इसके लिए सभी को बधाई । 

एक मुक्तक प्रस्तुत है:

मोक्ष की कामना देखिए 
स्वार्थ की साधना देखिए ।|
माँगते हैं मेरी अस्थियाँ
 उनकी ये याचना देखिए ।|
ईश का मोल है कर रहा
भक्त की भावना देखिए ।|
काट निबलों का सिर बलि कहें
 उनकी आराधना देखिए ॥
शीश से खंग काटेगा ये
 मूढ़ की कल्पना देखिए ||
देव दैत्यों में अब हो रहा 
आमना सामना देखिए ||
आज 'घायल' हुए लोग क्यों
 उनकी सद्भावना देखिए ॥