दृश्य एक (महाकाल्पनिक)
स्वन्तंत्रता प्राप्ति के अवसर पर गाँधीजी समेत की राष्ट्रीय हस्तियाँ खुशी का जश्न मना रहीं थीं । इस मौके पर मनोरंजन के लिए एक तवायफ़ को बुलाया गया जिसने नाचना आअरम्भ किया । उसने इतना तेज नृत्य किया कि हवा से उसका लहँगा ऊपर उठ गया । उपस्थित सभी लोगों ने अपनी आँखें मूँद लीं । फ़िर थोडी देर बाद धीरे धीरे सभी ने अपनी आँखें खोलीं । जवाहर्लाल जी ने पूछा बापू आप ने आँखें क्यों मूँद लीं, तो गाँधीजी ने कहा कि उस समय मुझे साबरमती आशम दिखायी पडा जहाँ मैं कन्याओं के साथ अपने कामजयी होने का परीक्षण किया करता था, उसी में मैं ध्यानमग्न हो गया था । अच्छा तुम सभी बताओ कि तुमने क्यों आँखें मूँद ली । एक एक करके सभी ने अपने अनुभव बताए । जवाहरलाल जी ने कहा कि उस समय जब उसका लहँगा ऊपर उठ गया था तो मुझे तिरंगा झण्डा नज़र आया िसलिए उसे नमन कर रहा था ।
कविवर रवीन्द्रनाथ टैगोर से पूछा गया तो उन्होने कहा कि मुझे तो बंगाल की खाडी नज़र आई इसलिए मैं वंगभूमि (भंगभूमि) को प्रणाम कर रहा था ।
आर एस एस प्रमुख ने बताया कि मुझे तो हल्दीघाटी का दृश्य दिखयी दिया ।
सीमांत गाँधी अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ाँ से पूछागया तो उन्होंने कहा कि मुझे तो पाक हज़रत बल का दीदार हुआ ।
दृश्य - दो (अतिकाल्पनिक)
कालान्तर में स्वतंत्रता दिवस के एक अन्य आयोजन में उसी प्रकार का नत्य हुआ और जब नर्तकी ने जोर से नाच दिखयी तो उसका लहँगा ऊपर उठ गया । इस पर उस महफ़िल में उपस्थित भूत्पूर्व प्रधन्मंत्री अटल बिहारी बाजपेयी से जब पूछा गया कि उन्होंने क्यों आँख मूँद ली तो उन्होंने कहा कि मुझे तो साक्षात क्न्या कुमारी के दर्शन हुए इसलिये मैं भ्हवविभोर हो गया । जब मुलायम सिंग यादव से पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि मुझे तो बाबरी मस्जिद का टूटा ढँचा नज़र आया जिसमें परिंदा पर मार चुका था, इस्लिए उसी शोक में मैंने आँखें मूँद ली थी ।
दृश्य तीन (काल्पनिक)
एक अन्य स्वतंत्रता दिवस की संध्या पर पुनः उसी तरह का आयोजन हुआ और नर्तकी ने अपना नृत्य आरंभ किया । मह्फ़िल में प्रधानमंत्री डाँ. मनमोहन सिंह अपने मंत्रिमण्डलीय सहयोगियों के साथ नृत्य का आनंद ले रहे थे । विपक्ष द्वारा उन पर बार बार ढीला होने का आरोप लग रहा था । अतः वे जोश में आए और्भाँगडा डांस करने लगे, परन्तु अभ्यास न होने के कारण अच्छी तरह से डांस नहीं कर पा रहे थे, तो नर्तकी ने कहा कि प्रधनमंत्रीजी ये कोई डांस है, ये आप क्या कर रहे हैं, तो उन्होंने कहा बाईजी मैं डांस थोडे न कर रहा हूँ, मैं तो कश्मीर समस्या हल कर रहा हूँ ।
स्वन्तंत्रता प्राप्ति के अवसर पर गाँधीजी समेत की राष्ट्रीय हस्तियाँ खुशी का जश्न मना रहीं थीं । इस मौके पर मनोरंजन के लिए एक तवायफ़ को बुलाया गया जिसने नाचना आअरम्भ किया । उसने इतना तेज नृत्य किया कि हवा से उसका लहँगा ऊपर उठ गया । उपस्थित सभी लोगों ने अपनी आँखें मूँद लीं । फ़िर थोडी देर बाद धीरे धीरे सभी ने अपनी आँखें खोलीं । जवाहर्लाल जी ने पूछा बापू आप ने आँखें क्यों मूँद लीं, तो गाँधीजी ने कहा कि उस समय मुझे साबरमती आशम दिखायी पडा जहाँ मैं कन्याओं के साथ अपने कामजयी होने का परीक्षण किया करता था, उसी में मैं ध्यानमग्न हो गया था । अच्छा तुम सभी बताओ कि तुमने क्यों आँखें मूँद ली । एक एक करके सभी ने अपने अनुभव बताए । जवाहरलाल जी ने कहा कि उस समय जब उसका लहँगा ऊपर उठ गया था तो मुझे तिरंगा झण्डा नज़र आया िसलिए उसे नमन कर रहा था ।
कविवर रवीन्द्रनाथ टैगोर से पूछा गया तो उन्होने कहा कि मुझे तो बंगाल की खाडी नज़र आई इसलिए मैं वंगभूमि (भंगभूमि) को प्रणाम कर रहा था ।
आर एस एस प्रमुख ने बताया कि मुझे तो हल्दीघाटी का दृश्य दिखयी दिया ।
सीमांत गाँधी अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ाँ से पूछागया तो उन्होंने कहा कि मुझे तो पाक हज़रत बल का दीदार हुआ ।
दृश्य - दो (अतिकाल्पनिक)
कालान्तर में स्वतंत्रता दिवस के एक अन्य आयोजन में उसी प्रकार का नत्य हुआ और जब नर्तकी ने जोर से नाच दिखयी तो उसका लहँगा ऊपर उठ गया । इस पर उस महफ़िल में उपस्थित भूत्पूर्व प्रधन्मंत्री अटल बिहारी बाजपेयी से जब पूछा गया कि उन्होंने क्यों आँख मूँद ली तो उन्होंने कहा कि मुझे तो साक्षात क्न्या कुमारी के दर्शन हुए इसलिये मैं भ्हवविभोर हो गया । जब मुलायम सिंग यादव से पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि मुझे तो बाबरी मस्जिद का टूटा ढँचा नज़र आया जिसमें परिंदा पर मार चुका था, इस्लिए उसी शोक में मैंने आँखें मूँद ली थी ।
दृश्य तीन (काल्पनिक)
एक अन्य स्वतंत्रता दिवस की संध्या पर पुनः उसी तरह का आयोजन हुआ और नर्तकी ने अपना नृत्य आरंभ किया । मह्फ़िल में प्रधानमंत्री डाँ. मनमोहन सिंह अपने मंत्रिमण्डलीय सहयोगियों के साथ नृत्य का आनंद ले रहे थे । विपक्ष द्वारा उन पर बार बार ढीला होने का आरोप लग रहा था । अतः वे जोश में आए और्भाँगडा डांस करने लगे, परन्तु अभ्यास न होने के कारण अच्छी तरह से डांस नहीं कर पा रहे थे, तो नर्तकी ने कहा कि प्रधनमंत्रीजी ये कोई डांस है, ये आप क्या कर रहे हैं, तो उन्होंने कहा बाईजी मैं डांस थोडे न कर रहा हूँ, मैं तो कश्मीर समस्या हल कर रहा हूँ ।
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