कवि का नाम तथा प्रतिनिधि रचनाओं के अंश-
१. राम सहाय मिश्र "कोमल शास्त्री" -
समन्दर छोड़ आया हूँ मछलियाँ छोड़ आया हूँ
गुलिस्ताँ छोड़ आया हूँ तितलियाँ छोड़ आया हूँ
कलम जब हाथ में लेने चला तो ये ख़्याल आया
किसी के गेसुए ख़म में उँगलियाँ छोड़ आया हूँ ॥
तन किसी के पास है तो मन किसी के पास है
मन किसी के पास है तो तन किसी के पास है
किन्तु मेरी जिन्दगी में क्या विरोधाभास है
न तन ही अपने पास है न मन ही अपने पास है ॥
द्वारका का द्वार कोई कंस क्क्या सजायेगा
नीर है कि क्षीर कोई हंस ही बताय़ेगा
गाल तो बजाने को बजाते हैं सभी यहाँ
किन्तु बाँसुरी तो कोई कृष्ण ही बजायेगा ॥
जिन्दगी में कुछ नहीं न तृप्ति है न प्यास है
चाँदनी धुली धुली खुला खुला आकाश है
ज्जिन्दगी है तब तलक कि जब तलक ये साँस है
पहले भी उदास थी और आज भी उदास है ॥
एक दिन ऐसे वैसे में मर जायेगा
हासिये पर तुझे वक्त कर जायेगा
मेरे पहलू में आ जा खुदा की कसम
तेरा दामन मुहब्बत से भर जायेगा ॥
उड़ते पंछी का पर्वत पर कोई नहीं ठिकाना है
इस जंगल से उस जंगल तक केवल दौड़ लगाना है
चिता कह रही लाश कह रही मरघट की हर साँस कह रही
आज नहीं तो कल तुझको भी इस दुनिया से जाना है ॥
चाहता हूँ आँख आँख भर तेरी निहार लूँ
चाहता हूँ सिन्धु सा अथाह तुझे प्यार दूँ
तुम बनो गुलाब की सुगन्धमयी पाँखुरी
मैं उसी की छाँव में ही जिन्दगी गुजार दूँ ॥
२. दिनेश कुमार सिंह"घायल"
वो आए हैं यहाँ पर रँगबिरंगी मछलियाँ लेकर
हक़ीक़त है यही वो आ गए हैं बिजलियाँ लेकर
ये इक मासूम बच्चा देखता ही रह गया घायल
मगर देखो वो भौंरे उड़ गए है तितलियाँ लेकर ॥
सुख दुख का ताप सहन करना ही जीवन की परिभाषा है
दुख दर्द बाँट लूँ औरों का मेरे मन की अभिलाषा है
छल दम्भ ढोंग भ्रम विकृत अहिइंसा का मैं घोर विरोधी हूँ
जिसका अनुरागी मैं वह सत्पथ संघर्षों की भाषा है ॥
धीरे धीरे चमन इश्क का बियाबान हो जायेगा
जीवन के मसलों का यूँ ही समाधान हो जायेगा
अपने आतंकी यौवन के बम मत लेकर चला करो
वरना ये घायल दिल अपना मुसलमान हो जायेगा ॥
सद्भावों सत्कर्मों का आभरण देखता हूँ
रूप ही नहीं निर्मल अन्त:करण देखता हूँ
पावन मन होगा तो मेरी दृष्टि समझ पाओगे
मैं लोगों के चरण नहीं आचरण देखता हूँ ॥
इक नज़र का कमाल कर देना
तुम खुदा को निहाल कर देना
तुम्हें शवाब मिलेगा जानम
कोई क़ाफ़िर हलाल कर देना ॥
अपना दामन छुड़ा कर चले जाइए
मेरे दिल को जला कर चले जाइए
इस ज़माने में हर बेवफ़ा की तरह
आप भी मुस्कराकर चले जाइए ॥
किसी के हाथ में खुद साग़रोमीना नहीं आता
शराबे हुस्न आँखों से जिसे पीना नहीं आता
जो घुट घुट करके साक़ी की अदा देखा किए तरसे
उसे मरना नहीं आता उसे जीना नहीं आता ॥
बाबर के वंशज भी ’महान’ हो गए ?
हँसते हुए उपवन भी वीरान हो गए
जिनको था देश प्यारा वे बलिदान हो गए
जिनको था शीश प्यारा मुसलमान हो गए ॥
हर तरफ़ चीख है ये शोर शराबा जाए
कुछ करो बन्द हो ये ख़ून ख़राबा जाए
जिसको है प्यार मेरे देश से वो रह ले यहाँ
वरना वो रोम मदीने को या काबा जाए ॥
दुख दर्द प्यार इज़्ज़त जज़्बात नहीं माने
समझाओ चाहे जितना पर बात नहीं माने
क़समें सबूत इनकी देते रहो दुहाई
जो लात का है आदी वो बात नहीं माने ॥
उसके मगर के आँसू झूठे सभी वादे हैं
ओसामा बिन लादेन को जो पीठ पे लादे हैं
वो बन चुका है सारी दुनिया के लिए ख़तरा
है नाम पाक उसका नापाक़ इरादे हैं ॥
कुछ खेल प्रेमियों को झाबर लगे अच्छा
कुछ तेल प्रेमियों को डाबर लगे अच्छा
करते हैं सियासत जो मज़हब के नाम पर
उन देशद्रोहियों को बाबर लगे अच्छा ॥
गाँधी तेरी घोर अहिंसा का जवाब लिख जाऊँगा
बूढ़े भारत के माथे पर मैं शबाब लिख जाऊँगा
इसी सदी में इसी क़लम से मैं ये वादा करता हूँ
बच्चे बच्चे की ज़बान पर इन्क़लाब लिख जाऊँगा ॥
क्या पता कब मिले कब जुदा हो गए
लोग कहते हैं अब वो ख़ुदा हो गए
आजकल सात पर्दों में रहते हैं वो
जो सियासत से शादीशुदा हो गए ॥
सारी दुनियी जाग रही है फिर मैं कैसे सो जाऊँ
दुआ करो जीवन का बोझा धीरे धीरे ढो जाऊँ
मेरे बच्चे नौजवान बेरोज़गार लाचार हुए
फिर मैं ऐसे कैसे इतनी जल्दी बूढ़ा हो जाऊँ ॥
ये मेरा वतन जंग के मैदाँ से कम नहीं
कुछ लोग यहाँ हाथ में तलवार लिए हैं
लगते हैं बदसलूक़ बड़े नाव के माझी
नादान हैं जो हाथ में पतवार लिए हैं ॥
हर एक हमसफ़र जानेजिगर नहीं होता
इसलिए मेराकोई हमसफ़र नहीं होता
हम भी कुछ आप्के मानिंद चुप रहे होते
हमारा रहबर गर बेख़बर नहीं होता ॥
खुला रखते दरो दिल दोस्त से पर्दा नहीं करते
न पूरा कर सकें ऐसा कोई वादा नहीं करते
लगी हो आग गुलशन में दरख़्तों पे क़हर बरपा
हम ऐसे वक़्त हुस्नोइश्क़ की चर्चा नहीं करते ॥
समन्दर से पूछो मछलियों से पूछो
मेरी आँख की इन पुतलियों से पूछो
है क्या मेरे दीवारे दिल पे इबारत
ये शोलों से पूछो बिजलियों से पूछो ॥
ये तलाक देने की नादानी मत कर
दे करके ये मेहर मेहरबानी मत कर
मेरी जवानी इन बच्चों का क्या होगा?
हरी भरी बगिया में बीरानी मत कर ॥
सभी समान हैं ऐसा नहीं है
हरेक शख्स इक जैसा नहीं है
उसने मुँह फेर लिया ठीक ही है
हमारे हाथ में पैसा नहीं है ॥
किस्से में आग है न कहानी में आग है
क्या कह रहे हो हुस्न के पानी में आग है?
दीवाने से कह दो कि ज़रा होश में रहना
बच के निकल जा उसकी जवानी में आग है ॥
कुछ इधर कुछ उधर देखिए
उनकी तिरछी नजर देखिए
कितने ’घायल’ पड़े हैं यहाँ
हुस्न का ये क़हर देखिए ॥
ये जो दरिया मेरे अश्क़ों का काफ़ला है वो
किसी हमदोस्त से करता नहीं गिला है वो
ये उसकी रोशनी जो जल रहे आँखों के चराग
हुज़ूरेवाला फ़क़त आप की दुआ है वो ॥
उनकी तीरे नज़र देखिए
युँ न हो बेखबर देखिए
देखिए उठ रहा है धुआँ
मेरा दिल मेरा घर देखिए ॥
क्या पता कब मचल जाएगा
हाथ से दिल फिसल जाएगा
तुझको एहसास होगा तभी
जब मेरा दम निकल जाएगा ॥
खुद्दारियाँ गर अपनी भूले नहीं होते
उसके हसीन ख्वाब में झूले नहीं होते
अब लग रहा है आप को जो फित्रती बशर
तो आप उसपे आग बबूले नहीं होते ॥
तुम्हारी आँख की मस्ती उतर आयी शराबों में
तुम्हारे होठ की लाली उतर आयी गुलाबों में
इन आँखों के शरारों से जहाँ आग कग जाती
ग़नीमत है यही चेहरा छिपा रक्खा नकाबों में ॥
ज़मीं क्या सातों आसमान पढ़ के आया हूँ
बुते क़ाफ़िर में मैं ईमान पढ़ के आया हूँ
जिसमें मिलती है मुझे नूरे इलाही की झलक
मैं उसके हुस्न का क़ुरआन पढ़ के आया हूँ ॥
कोइ रोता कोइ हँसता कोई नाशाद होता है
उजड़ता है कोई घर तो कोई आबाद होता है
मेरी नाकामियों पे हँस मगर ये भी ज़ेहन में रख
जो मेरा प्यार ठुकराता है वो बरबाद होता है ॥
मैंने जिया है ज़िन्दगी को युँ क़हर के साथ
हाँ पी लिया शराबे ज़ीस्त इस ज़हर के साथ
कर दे हलाक़ क्यूँ मुझे तू दे रहा तलाक़
या दे मेरी दोशीजगी भी इस मेहर के साथ ॥
१. राम सहाय मिश्र "कोमल शास्त्री" -
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समन्दर छोड़ आया हूँ मछलियाँ छोड़ आया हूँ
गुलिस्ताँ छोड़ आया हूँ तितलियाँ छोड़ आया हूँ
कलम जब हाथ में लेने चला तो ये ख़्याल आया
किसी के गेसुए ख़म में उँगलियाँ छोड़ आया हूँ ॥
तन किसी के पास है तो मन किसी के पास है
मन किसी के पास है तो तन किसी के पास है
किन्तु मेरी जिन्दगी में क्या विरोधाभास है
न तन ही अपने पास है न मन ही अपने पास है ॥
द्वारका का द्वार कोई कंस क्क्या सजायेगा
नीर है कि क्षीर कोई हंस ही बताय़ेगा
गाल तो बजाने को बजाते हैं सभी यहाँ
किन्तु बाँसुरी तो कोई कृष्ण ही बजायेगा ॥
जिन्दगी में कुछ नहीं न तृप्ति है न प्यास है
चाँदनी धुली धुली खुला खुला आकाश है
ज्जिन्दगी है तब तलक कि जब तलक ये साँस है
पहले भी उदास थी और आज भी उदास है ॥
एक दिन ऐसे वैसे में मर जायेगा
हासिये पर तुझे वक्त कर जायेगा
मेरे पहलू में आ जा खुदा की कसम
तेरा दामन मुहब्बत से भर जायेगा ॥
उड़ते पंछी का पर्वत पर कोई नहीं ठिकाना है
इस जंगल से उस जंगल तक केवल दौड़ लगाना है
चिता कह रही लाश कह रही मरघट की हर साँस कह रही
आज नहीं तो कल तुझको भी इस दुनिया से जाना है ॥
चाहता हूँ आँख आँख भर तेरी निहार लूँ
चाहता हूँ सिन्धु सा अथाह तुझे प्यार दूँ
तुम बनो गुलाब की सुगन्धमयी पाँखुरी
मैं उसी की छाँव में ही जिन्दगी गुजार दूँ ॥
| दिनेश कुमार सिंह"घायल" |
वो आए हैं यहाँ पर रँगबिरंगी मछलियाँ लेकर
हक़ीक़त है यही वो आ गए हैं बिजलियाँ लेकर
ये इक मासूम बच्चा देखता ही रह गया घायल
मगर देखो वो भौंरे उड़ गए है तितलियाँ लेकर ॥
सुख दुख का ताप सहन करना ही जीवन की परिभाषा है
दुख दर्द बाँट लूँ औरों का मेरे मन की अभिलाषा है
छल दम्भ ढोंग भ्रम विकृत अहिइंसा का मैं घोर विरोधी हूँ
जिसका अनुरागी मैं वह सत्पथ संघर्षों की भाषा है ॥
धीरे धीरे चमन इश्क का बियाबान हो जायेगा
जीवन के मसलों का यूँ ही समाधान हो जायेगा
अपने आतंकी यौवन के बम मत लेकर चला करो
वरना ये घायल दिल अपना मुसलमान हो जायेगा ॥
सद्भावों सत्कर्मों का आभरण देखता हूँ
रूप ही नहीं निर्मल अन्त:करण देखता हूँ
पावन मन होगा तो मेरी दृष्टि समझ पाओगे
मैं लोगों के चरण नहीं आचरण देखता हूँ ॥
इक नज़र का कमाल कर देना
तुम खुदा को निहाल कर देना
तुम्हें शवाब मिलेगा जानम
कोई क़ाफ़िर हलाल कर देना ॥
अपना दामन छुड़ा कर चले जाइए
मेरे दिल को जला कर चले जाइए
इस ज़माने में हर बेवफ़ा की तरह
आप भी मुस्कराकर चले जाइए ॥
किसी के हाथ में खुद साग़रोमीना नहीं आता
शराबे हुस्न आँखों से जिसे पीना नहीं आता
जो घुट घुट करके साक़ी की अदा देखा किए तरसे
उसे मरना नहीं आता उसे जीना नहीं आता ॥
बाबर के वंशज भी ’महान’ हो गए ?
हँसते हुए उपवन भी वीरान हो गए
जिनको था देश प्यारा वे बलिदान हो गए
जिनको था शीश प्यारा मुसलमान हो गए ॥
हर तरफ़ चीख है ये शोर शराबा जाए
कुछ करो बन्द हो ये ख़ून ख़राबा जाए
जिसको है प्यार मेरे देश से वो रह ले यहाँ
वरना वो रोम मदीने को या काबा जाए ॥
दुख दर्द प्यार इज़्ज़त जज़्बात नहीं माने
समझाओ चाहे जितना पर बात नहीं माने
क़समें सबूत इनकी देते रहो दुहाई
जो लात का है आदी वो बात नहीं माने ॥
उसके मगर के आँसू झूठे सभी वादे हैं
ओसामा बिन लादेन को जो पीठ पे लादे हैं
वो बन चुका है सारी दुनिया के लिए ख़तरा
है नाम पाक उसका नापाक़ इरादे हैं ॥
कुछ खेल प्रेमियों को झाबर लगे अच्छा
कुछ तेल प्रेमियों को डाबर लगे अच्छा
करते हैं सियासत जो मज़हब के नाम पर
उन देशद्रोहियों को बाबर लगे अच्छा ॥
गाँधी तेरी घोर अहिंसा का जवाब लिख जाऊँगा
बूढ़े भारत के माथे पर मैं शबाब लिख जाऊँगा
इसी सदी में इसी क़लम से मैं ये वादा करता हूँ
बच्चे बच्चे की ज़बान पर इन्क़लाब लिख जाऊँगा ॥
क्या पता कब मिले कब जुदा हो गए
लोग कहते हैं अब वो ख़ुदा हो गए
आजकल सात पर्दों में रहते हैं वो
जो सियासत से शादीशुदा हो गए ॥
सारी दुनियी जाग रही है फिर मैं कैसे सो जाऊँ
दुआ करो जीवन का बोझा धीरे धीरे ढो जाऊँ
मेरे बच्चे नौजवान बेरोज़गार लाचार हुए
फिर मैं ऐसे कैसे इतनी जल्दी बूढ़ा हो जाऊँ ॥
ये मेरा वतन जंग के मैदाँ से कम नहीं
कुछ लोग यहाँ हाथ में तलवार लिए हैं
लगते हैं बदसलूक़ बड़े नाव के माझी
नादान हैं जो हाथ में पतवार लिए हैं ॥
हर एक हमसफ़र जानेजिगर नहीं होता
इसलिए मेराकोई हमसफ़र नहीं होता
हम भी कुछ आप्के मानिंद चुप रहे होते
हमारा रहबर गर बेख़बर नहीं होता ॥
खुला रखते दरो दिल दोस्त से पर्दा नहीं करते
न पूरा कर सकें ऐसा कोई वादा नहीं करते
लगी हो आग गुलशन में दरख़्तों पे क़हर बरपा
हम ऐसे वक़्त हुस्नोइश्क़ की चर्चा नहीं करते ॥
समन्दर से पूछो मछलियों से पूछो
मेरी आँख की इन पुतलियों से पूछो
है क्या मेरे दीवारे दिल पे इबारत
ये शोलों से पूछो बिजलियों से पूछो ॥
ये तलाक देने की नादानी मत कर
दे करके ये मेहर मेहरबानी मत कर
मेरी जवानी इन बच्चों का क्या होगा?
हरी भरी बगिया में बीरानी मत कर ॥
सभी समान हैं ऐसा नहीं है
हरेक शख्स इक जैसा नहीं है
उसने मुँह फेर लिया ठीक ही है
हमारे हाथ में पैसा नहीं है ॥
किस्से में आग है न कहानी में आग है
क्या कह रहे हो हुस्न के पानी में आग है?
दीवाने से कह दो कि ज़रा होश में रहना
बच के निकल जा उसकी जवानी में आग है ॥
कुछ इधर कुछ उधर देखिए
उनकी तिरछी नजर देखिए
कितने ’घायल’ पड़े हैं यहाँ
हुस्न का ये क़हर देखिए ॥
ये जो दरिया मेरे अश्क़ों का काफ़ला है वो
किसी हमदोस्त से करता नहीं गिला है वो
ये उसकी रोशनी जो जल रहे आँखों के चराग
हुज़ूरेवाला फ़क़त आप की दुआ है वो ॥
उनकी तीरे नज़र देखिए
युँ न हो बेखबर देखिए
देखिए उठ रहा है धुआँ
मेरा दिल मेरा घर देखिए ॥
क्या पता कब मचल जाएगा
हाथ से दिल फिसल जाएगा
तुझको एहसास होगा तभी
जब मेरा दम निकल जाएगा ॥
खुद्दारियाँ गर अपनी भूले नहीं होते
उसके हसीन ख्वाब में झूले नहीं होते
अब लग रहा है आप को जो फित्रती बशर
तो आप उसपे आग बबूले नहीं होते ॥
तुम्हारी आँख की मस्ती उतर आयी शराबों में
तुम्हारे होठ की लाली उतर आयी गुलाबों में
इन आँखों के शरारों से जहाँ आग कग जाती
ग़नीमत है यही चेहरा छिपा रक्खा नकाबों में ॥
ज़मीं क्या सातों आसमान पढ़ के आया हूँ
बुते क़ाफ़िर में मैं ईमान पढ़ के आया हूँ
जिसमें मिलती है मुझे नूरे इलाही की झलक
मैं उसके हुस्न का क़ुरआन पढ़ के आया हूँ ॥
कोइ रोता कोइ हँसता कोई नाशाद होता है
उजड़ता है कोई घर तो कोई आबाद होता है
मेरी नाकामियों पे हँस मगर ये भी ज़ेहन में रख
जो मेरा प्यार ठुकराता है वो बरबाद होता है ॥
मैंने जिया है ज़िन्दगी को युँ क़हर के साथ
हाँ पी लिया शराबे ज़ीस्त इस ज़हर के साथ
कर दे हलाक़ क्यूँ मुझे तू दे रहा तलाक़
या दे मेरी दोशीजगी भी इस मेहर के साथ ॥

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