मेरी है यह विकट कल्पना नभ के तारे तोडूँगा
दुनिया नहीं गोड पाया पर सारा भारत गोडूँगा
मुझसे बडा हठी दुनिया में कोई नहीं हुआ होगा
चाहे जितना कालिख पोतो फिर भी मुँह ना मोडूँगा
जिसको करने में कविवर रहीम का माथा चकराया
साथ लगाकर बेर केर आपस में नाता जोडूँगा
नाम कमाना है कुछ करना है तो उल्टी चाल चलो
लोगों से कह दो कि मैं बालू से तेल निचोडूँगा
दुश्मन से लडने का करतब मेरी अहिंसा बतलाती
कह दो परेशान मत हो मैं खुद अपना सिर फोडूँगा ॥
दुनिया नहीं गोड पाया पर सारा भारत गोडूँगा
मुझसे बडा हठी दुनिया में कोई नहीं हुआ होगा
चाहे जितना कालिख पोतो फिर भी मुँह ना मोडूँगा
जिसको करने में कविवर रहीम का माथा चकराया
साथ लगाकर बेर केर आपस में नाता जोडूँगा
नाम कमाना है कुछ करना है तो उल्टी चाल चलो
लोगों से कह दो कि मैं बालू से तेल निचोडूँगा
दुश्मन से लडने का करतब मेरी अहिंसा बतलाती
कह दो परेशान मत हो मैं खुद अपना सिर फोडूँगा ॥
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