कवि इन्दु प्रकाश ’इन्दु’ की एक रचना मे अहिंसा तथा देश के हालात पर चिंता कुछ इस प्रकार है -
देशवा माँ जौ फिर अऊत्या बप्पू
नीक बाति समझऊत्या बप्पू
सत्य अहिंसा कहत भरेमा
बीसन लप्पड पऊत्या बप्पू ॥
देशवा माँ जौ फिर अऊत्या बप्पू
नीक बाति समझऊत्या बप्पू
सत्य अहिंसा कहत भरेमा
बीसन लप्पड पऊत्या बप्पू ॥
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